Tuesday, April 24, 2012

वो अपनी ज़िन्दगी में हुवा मसरूफ इतना,

वो अपनी ज़िन्दगी में हुवा मसरूफ इतना,
वो किस किस को भूल गया उसे ये भी याद नहीं .
बुजदिल हैं वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते,
बोहत हौसला चाहिये बर्बाद होने के लिए
 रितेश  जब लगा था तीर तब इतना दर्द न हुवा ,
ज़ख्म का एहसास तब हुआ जब कमान देखि अपनों के हाथ में 
तुम्हे भूल जाने की कोशिशे कामयाब हो रही है ,
तुम भी हो सके तो न आना ख्वाबों में " सीमा "
 " रितेश "हर मोड़ पे मिलते है हमदर्द हजारो
"लाल" लगता है इस शहर में अदाकार बहोत है
 
वोह अपनी सारी नफरतें मुझपे लुटता रहा
 
मेरा दिल जिसको  सदा मोहब्बतें सिखाता रहा

उसकी याद का ज़रा यह पहलु तोह देखो
 
मुझसे किये वादे वोह किसी और से निभाता रहा

कुछ खबर नहीं वोह शख्स क्या चाहता था
 
के तालुक तोड़ कर भी मुझको आजमाता रहा

टूटे हुए तालुक में भी कितनी मजबूती है
 
मैं जितना भूलता रहा वोह उतना याद आता रहा
 
ये तो एक जिद है के मैं शिकायत ना करूँ ?
वरना शिकवे तो हैं इतने मेरे यार के बस
मोहब्बत तो वो पहली ही मोहब्बत थी फराज़
इसके बाद तो हर शक्स में ढूँढा उस को
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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