Tuesday, April 24, 2012

आंसू आज दीवाने हैं

ये आंसू फिर आज दीवाने हैं,
फिर यादों में मीत पुराने हैं

जान चुके हम जिन को दिल से,
क्यों रिश्ते वही अनजाने हैं

लाख छुपाऊँ जग से बातें,
ढलकर अश्क कह जाने हैं

दर्द भरे इन रिश्तों के,
आख़िरी हिचकी तक माने हैं

टूट गएँ हैं पर न बिखरेंगे,
ज़ख्में जिगर तुझे दिखाने हैं

इन अश्कों को हम न पोंछेंगे,
तेरे दिए जो नजराने हैं

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