Tuesday, April 24, 2012

ज़िंदगी हम से उलझ कर आज तक मुश्किल में है

ज़माना हम दीवानों से उलझना छोड़ दे " रितेश "
ज़िंदगी हम से उलझ कर आज तक मुश्किल में है

समझ सके तोह समझ ज़िन्दगी की उलझन को ..
सवाल उतने नहीं हैं .........जवाब जितने हैं ..!
जो  छुपानी  थी  वही  बात  बता  दी  मुझको
ज़िन्दगी  तू  ने  बहोत  सख्त  सज़ा  दी  मुझको  !!!

कितने  अनमोल  होते  हैं  ये  मोहोब्बत  के  रिश्ते  ...
तालुक  टूट  भी  जाये  चाहत  फिर  भी  रहती  है ... 

" रितेश " उस  ने  कहा  आओ  नयी  दुनिया  बसाते  हैं
उसे  सूझी  शरारत  थी  यह  दिल  कुछ  और  समझा  था

वो अपनी ज़िन्दगी में हुवा मसरूफ इतना,

वो अपनी ज़िन्दगी में हुवा मसरूफ इतना,
वो किस किस को भूल गया उसे ये भी याद नहीं .
बुजदिल हैं वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते,
बोहत हौसला चाहिये बर्बाद होने के लिए
 रितेश  जब लगा था तीर तब इतना दर्द न हुवा ,
ज़ख्म का एहसास तब हुआ जब कमान देखि अपनों के हाथ में 
तुम्हे भूल जाने की कोशिशे कामयाब हो रही है ,
तुम भी हो सके तो न आना ख्वाबों में " सीमा "
 " रितेश "हर मोड़ पे मिलते है हमदर्द हजारो
"लाल" लगता है इस शहर में अदाकार बहोत है
 
वोह अपनी सारी नफरतें मुझपे लुटता रहा
 
मेरा दिल जिसको  सदा मोहब्बतें सिखाता रहा

उसकी याद का ज़रा यह पहलु तोह देखो
 
मुझसे किये वादे वोह किसी और से निभाता रहा

कुछ खबर नहीं वोह शख्स क्या चाहता था
 
के तालुक तोड़ कर भी मुझको आजमाता रहा

टूटे हुए तालुक में भी कितनी मजबूती है
 
मैं जितना भूलता रहा वोह उतना याद आता रहा
 
ये तो एक जिद है के मैं शिकायत ना करूँ ?
वरना शिकवे तो हैं इतने मेरे यार के बस
मोहब्बत तो वो पहली ही मोहब्बत थी फराज़
इसके बाद तो हर शक्स में ढूँढा उस को
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

सांस का रिश्ता

"  " सीमा   " भूल जायेंगे तुम्हे यह तुम से वादा है !

जिस्म से ज़रा सांस का रिश्ता तो टूट जाने दो !


आंसू आज दीवाने हैं

ये आंसू फिर आज दीवाने हैं,
फिर यादों में मीत पुराने हैं

जान चुके हम जिन को दिल से,
क्यों रिश्ते वही अनजाने हैं

लाख छुपाऊँ जग से बातें,
ढलकर अश्क कह जाने हैं

दर्द भरे इन रिश्तों के,
आख़िरी हिचकी तक माने हैं

टूट गएँ हैं पर न बिखरेंगे,
ज़ख्में जिगर तुझे दिखाने हैं

इन अश्कों को हम न पोंछेंगे,
तेरे दिए जो नजराने हैं

Saturday, February 4, 2012

मत इंतज़ार कराओ हमे इतना


मत इंतज़ार कराओ हमे इतना
कि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाये
क्या पता कल तुम लौटकर आओ
और हम खामोश हो जाएँ

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है

दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए

मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।

लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।

भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,
हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,
बात कहके तो कोई भी समझलेता है,
पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है...!

मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती,
उम्र बिताना ही ज़िन्दगी नहीं होती,
दोस्त को रोज याद करना पड़ता है,
दोस्ती कर लेनी हीं दोस्ती नहीं होती!!@!!!!