Wednesday, April 13, 2011

मैं तब रोता हूं


मैं तब रोता हूं, कोई जब तड़पता है किसी को तड़प से बचाने के लिए। कोई जब अपने हिस्से की रोटी देता है भूखे को खाने के लिए।
कोई जब एक पल भी देर किए बिना
अपना खून देता है किसी को बचाने के लिए।

कोई जिन्दगी गंवा देता है
किसी के चेहरे पर रौनक लाने के लिए।

जब कोई देता है किसी बेसहारे को सहारा
इस दुनिया में उसका हिस्सा पाने के लिए।

मैं तब रोता हूं
इन पलों के अपनत्व को ह्रदय में सामने के लिए।

ये आंसू बहुत कीमती हैं,
इन्हें यूं ही मत गंवाया करो।

किसी माशूक के रुठने पर
इन्हें मत बहाया करो।

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