Monday, August 16, 2010

आँसू में ना ढूँदना हूमें,


आँसू में ना ढूँदना हूमें,दिल में हम बस जाएँगे,तमन्ना हो अगर मिलने की,तो बंद आँखों मैं नज़र आएँगे.लम्हा लम्हा वक़्त गुजर जाएँगा,चँद लम्हो में दामन छूट जाएगा,आज वक़्त है दो बातें कर लो हमसे,कल क्या पता कौन आपके ज़िंदगी में आ जाएगा.पास आकर सभी दूर चले जाते हैं,हम अकेले थे अकेले ही रह जाते हैं,दिल का दर्द किससे दिखाए,मरहम लगाने वाले ही ज़ख़्म दे जाते हैं,वक़्त तो हमें भुला चुका है,मुक़द्दर भी ना भुला दे,दोस्ती दिल से हम इसीलिए नहीं करते,क्यू के डरते हैं,कोई फिर से ना रुला दे,ज़िंदगी मैं हमेशा नये लोग मिलेंगे,कहीं ज्यादा तो कहीं काम मिलेंगे,ऐतबार ज़रा सोच कर करना,मुमकिन नही हर जगह तुम्हे हम मिलेंगे।खुशबू की तरह आपके पास बिखर जाएँगे,शुकुन बन कर दिल मे उतर जाएँगे,महसूस करने की कोशिश तो कीजिए,दूर होते हुए भी '' रितेश '' पास नजर आएँग

Monday, August 9, 2010

कुछ दूर हमारे साथ चलो


कुछ दूर हमारे साथ चलो ,हम अपनी कहानी कह देंगे ॥,
समझे न जिसे तुम आँखों से, वो बात ज़ुबानी कह देंगे॥!! "..... कौन है ...??कौन है जो एक साए की तरहमेरे दिल को छूती हुई गुज़र जाती है...कभी पास से कभी दूर से..??एक आवाज़ ... एक नगमा ...एक गीत बन कररग -रग मे उतर जाती है...कभी पास से कभी दूर से..!!कौन है जो मुझको अपनी तनहाई का एहसास दिला जाती है ..एक खालीपन .. सूनापन छोड़ जाती है ......??मैं उसे देखना चाहता हूँ ...जानना चाहता हूँ ...उँगलियों से उसके चहरे को छूना चाहता हूँ ...!!कौन है जो पास रहकर भी मुझसे दूर है ....??कभी पास से कभी दूर से ...??कौन है जो पास रहकर भी मुझसे दूर है ....क़दमों की आहट सुनता हूँ , पलट कर उसे देखता हूँ ....तस्वीर बन जाता हूँ । ।बेखुद हो जाता हूँ ....!!कौन है जो " रितेश " के दिल को साए की तरह छूती हुई गुज़र जाती है ...??