Monday, July 19, 2010

बड़ी बात है


द्वन्द्व को पार करना बड़ी बात है अपने दुख से उबरना बड़ी बात है
जंगलों-जंगलों, पर्वतों-पर्वतों गंध बनकर बिखरना बड़ी बात है

रूप में अपनी परछाई को देखकर दर्पनों का सँवरना बड़ी बात है

लोग नासूर कह कर डराने लगे उन दिनों, घाव भरना बड़ी बात है
अपने आतंक के राज्य को त्याग कर सिरफिरों का सुधरना बड़ी बात है
शेर सुन कर समझने का दावा कर शायरी में उतरना बड़ी बात है
" रितेश " कहते है अपनी सीमा को पहचान कर भी कभी अपनी हद से आगे गुज़रना बहुत बड़ी बात है.

No comments:

Post a Comment