Saturday, June 12, 2010

उनको एक पत्र लिखता हूं


मैं हर दूसरे छण उनको एक पत्र लिखता हूं मगर सभी कागज पर नहीं उतरते, सच , यह मेरी बड़ी से बड़ी पीड़ा है
कि जिनको मैं अतिशय प्रेम करता हूं वो इसी कारण ''रितेश'' को पागल समझते है!
कदम कदम पर बहारो ने साथ छोड दिया, पडा जब वक़्त तो अपनो ने साथ छोड दिया, कसम खाई थी इन सितारो ने, साथ देने की, सुबह होते ही सितारो ने भी साथ छोड दिया,
पीने बैठा हूँ ,पीये जा रहा हूँ ... न कोई मकसद है न इरादा है .... जब याद तेरी आई तो इतना होश कहाँ कि कम है कि ज्यादा है.

1 comment:

  1. ohoh bahut sundar ...... जिनको मैं अतिशय प्रेम करता हूं वो इसी कारण ''रितेश'' को पागल समझते है!
    bahut umda abhivyakti.
    follow kar liya hai .. ab musalsal baaten hoti rahengi
    satya

    ReplyDelete