हर रात एक नाम याद आता है कभी सुबह कभी शाम याद आता है, जब सोचता हूँ कर लू दूसरी मोहब्बत फ़िर पहली मोहब्बत का अंजाम याद आता है!
सजा मिली है उनसें दूर रहने की ये बात नही है किसी और से कहने की, हम तो रह लेंगे उनके बिना भी,पर इन आशुओ को आदत है,उनकी याद में बहने की!
साथ छोड़ के कभी हमसे जुदा मत होना वफ़ा चाहिए तुमसे,बेवफा मत होना, रूठे चाहे सारी दुनियाँ हमसे,पर दोस्त तुम कभी खफ़ा मत होना!
रोयेंगी ये आँखे मुस्कराने के बाद आएगी रात दिन ढल जाने के बाद, कभी रूठना ना मुझसे मेरे दोस्त शायद ये जिन्दगी ना रहे तेरे रूठ जाने के बाद!
रह-रह के उनकी याद सताए तो क्या करे उनकी याद दिल से ना जाए तो क्या करे, सोचा था ख्वाबों में मुलाकात होगी,लेकिन ''रितेश''जब नींद ही ना आए तो क्या करे!
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